सपोर्ट और रेज़िस्टेंस आसान भाषा में
बुनियादी विचार
सपोर्ट वह भाव क्षेत्र है जहाँ गिरता हुआ भाव पहले कई बार रुका या ऊपर मुड़ा है। रेज़िस्टेंस वह भाव क्षेत्र है जहाँ बढ़ता हुआ भाव पहले कई बार रुका या नीचे मुड़ा है।
ये क्यों बनते हैं
बहुत से खरीदार और बेचने वाले एक ही भाव याद रखते हैं। जब भाव फिर उस स्तर पर आता है जहाँ पहले असर दिखा था, तो लोग दोबारा कदम उठाते हैं, इसलिए वह स्तर फिर मायने रख सकता है।
इन्हें कैसे मार्क करें
बड़े टाइम फ्रेम पर जाएँ। वे जगहें देखें जहाँ भाव ने एक से ज़्यादा बार प्रतिक्रिया दी हो। पतली रेखा की जगह एक ज़ोन बनाएँ, क्योंकि भाव शायद ही किसी एक सटीक अंक पर मुड़ता है।
जब स्तर टूटते हैं
स्तर हमेशा टिके नहीं रहते। अगर भाव ताकत के साथ किसी स्तर को पार कर जाए, तो पुराना रेज़िस्टेंस आगे चलकर सपोर्ट बन सकता है, और उल्टा भी। कभी-कभी ऐसा नहीं भी होता, इसलिए पुष्टि का इंतज़ार करना और गलत होने की स्थिति की योजना बनाना दोनों ज़रूरी हैं।
मुख्य बातें
- सपोर्ट और रेज़िस्टेंस ज़ोन होते हैं, सटीक रेखाएँ नहीं।
- ज़्यादा बार छूने से स्तर ज़्यादा नज़र आता है, पक्का नहीं हो जाता।
- बड़े टाइम फ्रेम का वज़न ज़्यादा होता है।
- कदम उठाने से पहले अपना जोखिम तय करें।
ट्रेडिंग में जोखिम होता है। यह लेख केवल शिक्षा और जानकारी के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है, और कोई भी कोर्स या तरीका मुनाफ़े की गारंटी नहीं देता और नुकसान का जोखिम खत्म नहीं करता।