पोज़िशन साइज़िंग और स्टॉप लॉस की जानकारी
दो अलग बातें
स्टॉप लॉस वह भाव है जहाँ आप घाटे वाले ट्रेड से निकलने का फ़ैसला करते हैं। पोज़िशन साइज़ यह है कि आप कितना खरीदते या बेचते हैं। दोनों साथ चलते हैं: स्टॉप तय करता है कि भाव आपके खिलाफ कितना जा सकता है, और साइज़ तय करता है कि उसकी कीमत कितनी होगी।
एक आसान उदाहरण
मान लें आपने तय किया कि एक ट्रेड में पूँजी का एक छोटा तय हिस्सा ही डूब सकता है। अगर स्टॉप एंट्री से दूर है, तो साइज़ छोटा रखना होगा। अगर पास है, तो साइज़ बड़ा हो सकता है। नुकसान की सीमा वही रहती है।
यह क्यों ज़रूरी है
बड़े नुकसान से उबरना मुश्किल होता है। आधी पूँजी डूबने पर बची रकम को दोगुना करना पड़ता है। छोटे और नियंत्रित नुकसान आपको इतना टिकाए रखते हैं कि आप सीख सकें।
सावधानियाँ
भाव स्टॉप के पार कूद सकता है, इसलिए असल नुकसान योजना से बड़ा हो सकता है। स्टॉप नियंत्रण का साधन है, गारंटी नहीं।
मुख्य बातें
- स्टॉप लॉस वह जगह है जहाँ घाटे का ट्रेड छोड़ते हैं।
- पोज़िशन साइज़ तय करता है कि उसकी कीमत कितनी है।
- पहले नुकसान की सीमा तय करें, फिर साइज़ निकालें।
- गैप से नुकसान योजना से बड़ा हो सकता है।
ट्रेडिंग में जोखिम होता है। यह लेख केवल शिक्षा और जानकारी के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है, और कोई भी कोर्स या तरीका रिटर्न का वादा नहीं करता या नुकसान का जोखिम खत्म नहीं करता।