फ्यूचर्स और ऑप्शंस की बुनियादी बातें: ये क्या हैं और इनमें जोखिम क्यों है
एक लाइन में डेरिवेटिव
फ्यूचर्स और ऑप्शंस डेरिवेटिव हैं। इनकी कीमत किसी दूसरी संपत्ति से आती है, जैसे कोई शेयर या इंडेक्स।
फ्यूचर्स
फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट एक समझौता है कि किसी चीज़ को भविष्य की तारीख पर तय भाव पर खरीदा या बेचा जाएगा। इसमें मार्जिन लगता है, यानी आप कुल मूल्य का एक हिस्सा जमा करते हैं। लाभ और नुकसान पूरे कॉन्ट्रैक्ट मूल्य के आधार पर होते हैं।
ऑप्शंस
ऑप्शन खरीदने वाले को तय तारीख से पहले तय भाव पर खरीदने या बेचने का अधिकार मिलता है, ज़िम्मेदारी नहीं। खरीदार प्रीमियम देता है। ऑप्शन बेचने वालों को बड़ा नुकसान हो सकता है।
इनमें जोखिम क्यों है
मार्जिन और लीवरेज के कारण नुकसान आपके शुरू में लगाए पैसे से भी बड़ा हो सकता है। एक्सपायरी पास आने पर ऑप्शन की कीमत तेज़ी से घट सकती है। नियम, मार्जिन और लॉट साइज़ बदल सकते हैं, इसलिए हमेशा आधिकारिक एक्सचेंज वेबसाइट पर मौजूदा नियम जाँचें।
शुरू करने से पहले
पहले कैश मार्केट की बुनियादी बातें सीखें। मार्जिन, एक्सपायरी और लॉट साइज़ समझें। पेपर ट्रेडिंग से अभ्यास करें, और केवल वही पैसा लगाएँ जिसे खोने का जोखिम आप उठा सकते हैं।
मुख्य बातें
- फ्यूचर्स और ऑप्शंस डेरिवेटिव हैं।
- लीवरेज नुकसान को भी बढ़ा सकता है।
- कई शुरुआती लोग डेरिवेटिव में पैसा खोते हैं।
- असली पैसे लगाने से पहले पढ़ाई और अभ्यास करें।
ट्रेडिंग में जोखिम होता है। यह लेख केवल शिक्षा और जानकारी के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है, और कोई भी कोर्स या तरीका मुनाफ़े की गारंटी नहीं देता और नुकसान का जोखिम खत्म नहीं करता।